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तनु, रवि, हनु

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तनु, रवि, हनु

Writer: H.P.Sarkar, Dhaleswar-13, Agartala, Tripura (W)

तनु और रवि एक ही स्कूल में सातबीँ कक्षा में पड़ते थे। दोनों के घर पास पास ही थे। वे लोग पैदल ही स्कूल जाते थे, आते थे। एक दिन स्कूल जाते समय अचानक एक बदमाश लड़का उनके रास्ता रोकके खड़ा हुआ। वह तनु और रवि की उम्र का था। उसने रवि से कहा “ रवि तू अच्छा लड़का है। इसलिए मैं तुझसे प्यार करता हूँ और तुझसे मुझे कोई झगड़ा नहीँ। मगर तनु अच्छा लड़का नहीँ है। वह खुद को बहुत होशियार समझता है। उसके साथ मुझे कुछ बातें करनी है। ”

रवि मन ही मन सोचा “उफ। मैं तो बच गया। उसके साथ मैं झगड़ा नहीं कर सकता इसलिए यहाँ से भाग जाता हूँ। ” रवि तनु को एकेला छोड़के वहाँ से चला गया। फिर वह बदमाश लड़के ने तनु का सारा टिफिन खा लिया, उसकी किताबें फाड़ दी और तनु के जेब में एक रुपया था वह भी ले गया। कुछ दिन तनु के साथ ऐसा ही होने लगा। वह बदमाश लड़का तनु को धमकाता “ अगर किसी को कुछ वताया तो तुझे बहुत मारुँगा। ” डर के मारे तनु भी किसी को कुछ नही बताता। फिर तनु ने एक रस्ता निकाला। वह अब स्कूम में टिफिन लेके नहीं जाता, साथ में पैसा भी नहीं रखता और किताबें भी बहुत कम रखता। अब वह बदमाश लड़का देखता है कि तनु के पास कुछ नहीं मिल रहा है तो उसने तनु को छोड़ रवि को एक दिन पकड़ा। उसने बोला “ तनु अब अच्छा लड़का बन गया है। लेकिन रवि, तू अब बहुत होशियारी दिखाने लगा है। तू रुक, तुझसे बातें करनी है। ” तनु वहाँ से चला गया। रवि ने उसे रुकने के लिए बहुत कहा लेकिन तनु नहीं रुका और चला गया। तब रवि के मन मे बहुत द:ख हुआ। वह सोचने लगा “ उस दिन अगर मैं तनु को एकेला न छोड़ा होता तो आज तनु भी मुझे छोड़के नहीं गया होता। आगे से कभी भी मैं किसी बदमाश की बात सुनके किसीको एकेला छोड़के नहीं भागूँगा। ” उस दिन उस बदमाश लड़के ने रवि का टिफिन खा लिया, उसकी किताबें फाड़ दी, रवि के जेब से पाँच रुपये भी ले लिए, उसे गालीयाँ भी दी।

कुछ दिन ऐसा ही चलता रहा कि अचानक एक दिन तनु का भाई भानु शहर से उनके घर घुमने आया। भानु को देखके तनु के तन में जैसे जान आई। भानु भी सातवीँ कक्षा में ही पड़ता था। भानु पढ़ाई-लिखाई में तो बहुत अच्छा है लेकिन वह भी बहुत ही बदमाश है। इस लिए लोग उसे भानु के बदले हनु कहते है।

नतु ने हनु को सारि बातें बताई। यह सुनके हनु को बहुत गुस्सा आया। उसने बोला “सारि गलती तुम दोनों की ही है। पहले दिन ही अगर उसे दो फटका मार देते तो बात इतनी बढ़ती ही नहीं। ” अगले दिन वे तीनों उसी रास्ते से स्कूल जाने लगे कि अचानक उस बदमाश लड़के ने उनका रास्ता रोका। हनु ने उससे पूछा कि क्यों वह हर दिन तनु और रवि को परेशान करता है?

वह बदमाश लड़का हनु की यह बात सुनके एक डंडा हात में लेके बहुत दादागिरी दिखाने लगा। वह बहुत डिंगे मार ही रहा था कि अचानक हनु ने उसे उसके दाहिने कान के नीचे एक जोरदार चाटा मारा। जैसे एक बिजली पलकों में गरजकर बरस गई। बाकी तीनों में कोई समझ ही न पाया कि यह क्या हो गया?

तनु, हनु और रवि को मालुम नहीं था कि उस बदमाश लड़के के उसी कान में कान की पुरानी बीमारी थी। अभी जो होना था वहीँ हुआ। वह बदमाश लड़का कान के दर्द के कारण ज़मीन मे गिर के जोर जोर से रोने लगा। यह देखके पलकों मे तनु , भानु और रवि वहाँ से गायब।

बहुत दिनोंके बाद एक दिन गाँव के तलाव के पास, एक सर्दी की सुबह फिर से ये तीनों के साथ उस लड़के का मुलाकत हुई। तीनों को एक साथ आते देखते ही उसने आनन फानन में तलाव में छलांग लगाई और कैसे भी करके तैरता हुआ उस पार गया और काँपते काँपते भाग गया।
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