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वृक्षारोपण

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वृक्षारोपण
Writer - विनीता मोहता, विदिशा, मध्य प्रदेश


# वृक्षारोपण
Writer- विनीता मोहता, विदिशा, मध्य प्रदेश

"अरे ओ रमेसिया, अरे रमेसीया कहां मर गया। जरा इधर तो आ।" अपने मुंह में भरे हुए पान मसाले की पिक थूकते हुए विधायक साहब ने अपने चेले कम सेक्रेटरी को आवाज लगाई।

अपने गले में पड़े हुए गमछे से अपने चेहरे पर आया पसीना पोछते हुए रमेश वही विधायक साहब के पैरों के पास बैठ गया ओर बोला, "आदेस मलिक?"

विधायक साहब मुस्कुराते हुए उसके सर पर हाथ फेरने में लगे हुए हैं और वह पालतू कुत्ते की तरह मुस्कुरा रहा था। उन्होंने पास रखें डब्बे में से एक पान निकाल कर उसे मुंह में दबाते हुए बोला, "अरे रमेसीया, इस गांव में सबसे ज्यादा पढ़ा लिखा तो तू ही है। ई देख ये मोबाइल पे फोटो के बात की आई है रे। ऊ हमरे विरोध में बगल के गांव का कोई नया छोरा आवाज उठा रहा है। उसने अब यह क्या नया बवाल खड़ा किया है?"

यह सुनकर बिना फोटो देखे रमेश मुस्कुराते हुए विधायक साहब की ओर देखकर बोला, "मालिक, आजकल के लौंडे-लपाडे 4 कक्षा का पड़ लेत है और चले आत हे बड़े लोगन की बराबरी करने। का करना है इ फोटो देखकर!! मिट्टी डालो ऐसे लोगन पर।"

"जे बात तो सही है पर कल गांव के प्रधान जी कह रहे थे उ नये छोकरे ने कोई भलता ही काम किया है। सभी लोग उकी बहुत तारीफ कर रहे थे, देख तो सही तू जरा क्या तीर मारा है उस ने?"

विधायक साहब के हाथ से उनका मोबाइल लेकर फोटो देखते हुए रमेश जोरों से हंसने लगा और बोला, "मालिक बड़ा ही बवाल किया है, इस छोकरे ने गांव में पौधे लगाए हैं। उसका फोटो डाला है। पौधे तो हमारा मगन भी रोज लगाता है। उका भी फोटु डाल देओ आप। आप लोगन के बीच ऊ भी मसहुर हो जयेगो।"

विधायक साहब ने अपने मुंह का पान थूकते हुए उसके सर पर एक जोरों से मारा और कहा, "हमें मूरख समझता है क्या? इ फोटो के नीचे का लिखा है ऊ पढ़ कर बता।"

अपने सर पर हाथ फेरते हुए रमेश बोला, "माफ कर दो मालिक, लाओ अभी पढ़ कर बता देत है।"

मोबाइल हाथ में लेकर रमेश पढ़ने लगा, "जन-पार्टी के उभरते नए नेता ने की पर्यावरण की चिंता। बारिश आने के पूर्व किया सघन वृक्षारोपण। उनके इस कदम से आने वाली पीढ़ी को बहुत लाभ पहुंचेगा। आज से पहले हमारे क्षेत्र के किसी भी नेता ने पर्यावरण से संबंधित कोई भी कार्य नहीं किया। यदि यह नेता इस बार चुनाव जीत जाते हैं तो हमारे जिले की उन्नति निश्चित है। अपनी सूझबूझ और दूरदर्शिता से समाज हित में कई कार्य किए जाएंगे।"

"इ का बोल रहा है तू रमेश... होश में तो है। वह कल का आया हुआ छोकरा हमारे खिलाफ चुनाव लड़ने को मन बना रहा है। और ई पेपर वाले भी उसका साथ दे रहे हैं। अब बता कुछ पेड़ पौधे लगा लिए उसमें तो क्या इतनी वाहवाही करना!! सारे मुंह का स्वाद ही खराब हो गया," कहते हुए उन्होंने अपने मुंह का पान थूक दिया

"मालिक आजकल सभी लोग पेड़ पौधे लगाकर उनके साथ फोटो निकाल रहे हैं। पहले लोग बीमारों की मदद करत थे; कुएं, बावड़ी खुदवात थे, मगर आजकल यही सब चल रहा है।"

"कुछ तो करना पड़ेगा, ऐसे तो हमारा जमा-जमाया यह धंधा खत्म हो जाएगा। कल तुम न्यूज़ पेपर में छपवा दो हम भी वृक्षारोपण करेंगे, सब पेपर वाले और टीवी वाले वहां पर मौजूद होने चाहिए। कोई भी नही छुटना चाही। समझ गये, की ना समझे, बडबुक।"

विधायक साहब की हां में हां मिलाकर रमेश वहा से चला गया। उस दिन से विधायक साहब अपनी हर मीटिंग ओर रेली में सभी कार्य पर्यावरण को ध्यान में रखकर करने लगे। अब उनके लिए अनावश्यक रूप से फूल माला नहीं लाई जाती है। कम आवाज में रैली को संबोधित करते थे ताकि ज्यादा ध्वनि प्रदूषण ना हो। धीरे-धीरे उनकी ख्याति जिले से निकलकर पूरे राज्य में फैलने लगी। सभी लोग उनके पर्यावरण प्रेम के दीवाने हो गए। जब भी पर्यावरण पर भाषण देते, सभी लोग मंत्रमुग्ध होकर की बातें सुनने लगते। अब तो विधायक जी का भी प्रमोशन हो गया था, अब वो विधायक ना रहकर सांसद बन चुके थे। धीरे-धीरे देश भर में उनकी ख्याति फैल रही थी। और उनके द्वारा लगाए गए वृक्षों की संख्या लाखों में हो चुकी थी। अब मंत्रि जी दिल्ली मे थे। उनकी रेली मे उन्होँने ऐसा भाषण दिया की उन्के ड्राईवर ने सोच लिया की अब से हर महिने 1 पौधा लगाऊंगा ओर उसकी बड़े होने तक रक्षा करूंगा। सिर्फ बड़े लोगों की क्यों हम लोग भी यदि एक-एक पौधा लगाएंगे तो देश में हरियाली छा जाएगी।

सांसद महोदय सभी लोगों में पौधा वितरण करने लगे, पौधा लेने के लिए लोगों की भीड़ लग गई थी। मगर सांसद साहब गरीबों को देने के बजाय सूट बूट पहन कर बैठे लोगों को पौधा पकड़ा रहे थे। उन के ड्राइवर को बात अच्छी नहीं लगी। वह सोचने लगा, "क्या बेचारे गरीब पेड़ पौधों की रक्षा नहीं कर सकते जो मालिक उन लोगों को पौधे नहीं दे रहे हैं। खैर, हमें क्या? मगर आज ही हम मलिक से एक पौधा लेकर जायेंगे ओर उसकी अच्छी तरह से देखभाल करेंगे। ताकि मालिक को भी पता चल जाए कि हम गरीब लोग भी पेड़ पौधों की इज्जत करते हैं।"

रैली खत्म होने के बाद रैली के आयोजकों ने भी सांसद महोदय को कुछ पौधे उपहार स्वरूप भेंट किए। उन के बंगले पर पहुंचकर जब वह कार से उतरने लगे तो उनका ड्राइवर डिक्की से पौधे निकाल कर बोला, "मालिक आप इन्हें यहीं पर भूल गए हैं, आप कहे तो मालि काका को दे आऊ ताकि वो इसे जमीन पर लगा कर उसकी सही तरीके से देखभाल कर सकें?"

ड्राइवर की बात सुनकर उनको जोरों से हंसी आ गई मगर फिर अपनी हंसी पर कंट्रोल करते हुए उन्होंने कहा, "जाओ, दे आओ। इन पौधों को तो जीवन नसीब हो जाए," कह कर वो अंदर जाने लगे तो उन्हें रोककर ड्राइवर ने दोबारा पूछा, "मालिक एक बात समझ में नहीं आई, आप ने जितने भी पौधे दिए हैं सब अमीरों को ही दिए हैं, एक भी हम जैसे गरीब को नहीं दिया। ऐसा क्यों? आपको लगता है हम लोग पौधों की रक्षा नहीं कर सकते है!!"

यह सुनकर सांसद महोदय हंसने लगे और अपने मुह में से चबाया हुआ पान थूक कर बोले, "लगता है अभी-अभी तुम नेताओं की गाड़ी चलाने लगे हो। तुम्हें अभी वक्त लगेगा हमारी भावनाओं को समझने में। शायद तुम्हेँ पता नहीं मगर मैं बताता हूं, तुम लोगों से बेहतर इस प्रकृति का ख्याल कोई नहीं रख सकता। हम लोग तो हमारे मतलब के लिए प्रकृति का दोहन करते ही रहते हैं। यदि किसी गरीब को मै पौधा दे देता, तो वह उसकी पूरी तरह देखभाल करता और उसे बड़ा परिपक्व पेड़ बना देता। मगर यह जो सूट बूट वाले लोग हैं ना, सिर्फ फोटो खींचने को पेड़ पौधे लगाते हैं। उनकी देखभाल से कोई मतलब नहीं रहता। जितने लोगों को पौधे दिए हैं ना, उनमें से आधे लोगों के पौधे तो कार में रखे-रखे ही सूख जाएंगे। कुछ लोग माली को पौधे पकड़ा कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेंगे। अभी तक जितने पौधे मैंने अकेले ने बाटे हैं। यदि सब के सब लग जाते तो इस देश का पर्यावरण कब का सुधर जाता," कहकर सांसद महोदय अपने घर में चले गए और उनका ड्राइवर कभी उनकी और देखता तो कभी अपने हाथ में रखे हुए पौधों को।
( समाप्त )


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