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प्यार की आवाज़

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प्यार की आवाज़
लेखिका -प्रीतिबाला चौधरी, मांडवी, सूरत, गुजरात


# प्यार की आवाज़
लेखिका -प्रीतिबाला चौधरी, मांडवी, सूरत, गुजरात
"मन्नु कहा जा रही हो बेटा?"

"अरे प्यारी मम्मी, आ रही हूँ... वो नदिया के पार मीठी-सी हवा खाने जा रही हूँ, और पानी में पत्थर डालने से गुलगुला-गुलगुला जैसी आवाज़ आती है ना, वो मुझे बहुत अच्छी लगती है, मम्मी!"

मम्मी ने प्यारी सी मुस्कान की, और बोली, "प्यारी मन्नु बेटा, वो आवाज़ तो मुझे भी बहुत अच्छी लगती है, चल मैं भी आज आती हूँ तेरे साथ, चल!"

मन्नु बोली, "नहीं मम्मा, जब मैं एकेली जाती हूँ तब ही मुझे मजा आता है। मम्मा मैं आपको ले जाऊंगी पर अभी नहीं। मम्मा, प्लीज समझो!"

मम्मा समझ गई, और मन्नु बोली, "बैंक्स यू मम्मी, आप बहुत अच्छी हो!"

मन्नु रोज नदिया के पार जाती और बैठ जाती। पत्थर गिनती एक- दो- तीन- चार और नदिया में पत्थर डालती; प्यारी सी गुलगुला आवाज़ सुनती। ऐसा लगता की वो गुलगुले की लग आवाज़ मन्नु के साथ बात कर रही है!

ऐसे ही दिन बीत रहे थे! एक दिन मन्नु की मम्मी ने पूछा, "ओय मेरी प्यारी पगली मन्नु, तुझे पत्थर डालने से क्या मिलता है बेटा? क्यों तू रोज पानी में पत्थर डालती है? क्या है इन आवाज़ो में जो तुझे सुकून देता है?"

मन्नु निराश हो गई और धीरे से बोली, "अरे मम्मा, मुझे अच्छा लगता है तो अच्छा लगता है, बस!"

मन्नु की मम्मी ने फिर से पूछा; पर मन्नु चुप ही रह गयी! अगले दिन शाम के 4-बजे जब मन्नु घर से निकली तब मन्नु की मम्मी ने उसका पीछा किया, और जा पहुंची वो नदिया क पार, जहाँ मन्नु पानी में पत्थर डाल रही थी और वो गुलगुला आवाज़ सुन रही थी, साथ में कुछ बोल भी रही थी। वो आवाज़ कुछ ऐसी थी, "आओ मेरे श्याम, तुम्हारे बिना आपकी मन्नु एकेली है," ऐसा बोलकर वो रो रही थी! ये सब मन्नु की मम्मी चुप कर देख रही थी! मन्नु को रोते हुए देख मम्मी मन्नु के पास आई और बोली, "क्या हुआ मन्नु बेटा? तुम ये आवाज सुनकर रो क्यों रही हो?"

तब मन्नु ने जवाब दिया, "मम्मी, श्याम नाम के एक लड़के से मुझे प्यार था, हम दोनों एक दूसरे को बहुत प्यार करते थे! हम रोज इस नदिया में पत्थर डालते और गुलगुला आवाज़ का मजा लेते थे! ये प्यारा सा गुलगुला आवाज़ हम दोनों को बहुत अच्छा लगता था! पर एक दिन एक्सीडेंट के कारण मेरे श्याम हमेशा के लिए मुझे छोड़ कर भगवान जी के पास चले गए!" मन्नु ने अपनी मम्मी को रोते हए गले लगा लिया और बोली, "मम्मी, मैं जब भी पानी में पत्थर डालती हूँ तो गुलगुला आवाज़ आती है, वो मैं मेरे श्याम की समझती हूँ। इसलिए मैं हर रोज मेरे प्यार की आवाज़ सुनने यहाँ चली आती हूँ!"
( समाप्त )


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