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गोपाल का सपना

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गोपाल का सपना
लेखक - किसलय हर्ष, बैद्यनाथ धाम, देवघर, झारखण्ड


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# गोपाल का सपना
लेखक - किसलय हर्ष, बैद्यनाथ धाम, देवघर, झारखण्ड
बारहवीं की परीक्षा खत्म हो चुकी थी। गोपाल, दिनकर, भार्गव और नीतिष सभी की परीक्षाएं अच्छी हुई थी। चारों मित्र एक साथ एक ही स्कूल में पढ़ते थे। परीक्षा खत्म होने के बाद चारों ने मिलकर खूब मौज- मस्ती की। ये चारों मिलकर घूमने के लिए नई-नई जगह जाते और वहां से बहुत सी चीजें सीख कर आते।

मौज-मस्ती करते-करते परीक्षा के परिणाम निकलने का समय भी नजदीक आ गया। चारों मित्रों को अब परीक्षा के परिणाम की चिंता सताने लगी। इन चारों में गोपाल सबसे अधिक चिंतित था। उसे परीक्षा में कम नंबर लाने की चिंता थी। उसे लगता था कि अगर उसके नंबर कम हुए तो वह सबके साथ मिलकर एक कॉलेज में नहीं पढ़ सकेगा। गोपाल की परीक्षा अच्छी हुई थी, फिर भी उसे परीक्षा के परिणाम का भय कुछ अधिक था।

परीक्षा का परिणाम कल इंटरनेट पर आने वाला था। सभी दोस्तों और उनके परिवार वालों की उत्सुकता अब बढ़ गई थी। गोपाल को रात में नींद भी ठीक से नहीं आ रही थी। उसे परिणाम की बहुत चिंता हो रही थी। काफी रात परीक्षा के परिणाम के बारे में ही वह सोचता रहा। सुबह उसने परिणाम देखा। उसने देखा कि दिनकर, भार्गव और नीतिष के परीक्षा परिणाम बहुत अच्छे हुए हैं। उन्हें नब्बे प्रतिशत से अधिक नंबर आए हैं, जबकि उसे केवल चौवालीस प्रतिशत नंबर प्राप्त हुए हैं। वह परीक्षा का परिणाम देखकर डर गया, उसे लगा कि उसके मम्मी-पापा अब उसे बहुत डांटेंगे, साथ-ही साथ स्कूल के सभी मित्र भी उसका मजाक बनायगें। वह यह सोचकर घबराने लगा और उसके मन में कई तरह के गलत विचार आने लगे। यहीं सब सोचकर वह कुछ पैसे लेकर घर से रेलवे-स्टेशन की तरफ चल पड़ा।

गोपाल ने रेलवे-स्टेशन पहुंचकर दिल्ली के लिए एक टिकट कटवाई और दिल्ली जानेवाली ट्रेन पर सवार हो गया। गोपाल का मन पूरी तरह से उखड़ा-उखड़ा सा था, इसलिए वह छोटी सी असफलता से घबरा कर जीवन के प्रति उदासीन हो गया था।

गोपाल अब किसी भी तरह से जीवन में सफल होना चाहता था। उसने सोचा कि वह दिल्ली जाकर एक निजी फर्म में कार्य कर कुछ अनुभव प्राप्त करेगा तथा इसके बाद वह अपना एक निजी फर्म खोलेगा। इस तरह से वह समाज में एक प्रतिष्ठित आदमी बन जाएगा, जिसके पास रूपये-पैसे की कोई कमी नहीं रहेगी। यही सोचता हुआ वह दिल्ली शहर पहुंचा। दिल्ली शहर पहुंचने पर उसका भ्रम टूट चूका था। उसे किसी भी कंपनी में कोई भी नौकरी नहीं मिली। मजबूर होकर उसने एक अपार्टमेंट बनाने वाली कंपनी में एक दैनिक मजदूर के रूप में नौकरी कर ली। अब वह दिन भर कार्य करता और शाम के समय उसे मजदूरी मिलती। उसकी अवस्था खराब हो चुकी थी। उसे पंक्ति में खड़े होकर भोजन लेना पड़ता, जिससे उसे मम्मी की बहुत याद आती थी; जो वह उनसे जिद करके तरह-तरह के भोजन करवाती थी।

अब उसे घर की याद आने लगी थी। उसे अपने द्वारा किए हुए गलती का अनुमान हो चूका था। उसे अनुमान हो चूका था कि मेहनत और समाज के डर से घर छोड़ कर उसे नहीं भागना चाहिए था, बल्कि दोस्तों और लोगों के मजाक का जवाब उसे कड़ी मेहनत कर और अगली बार अच्छा परिणाम देकर देना चाहिए था। वह अब सोचने लगा था कि बिना किसी को बताए घर से गायब हो जाने पर उसके मम्मी-पापा को कितनी परेशानी उठानी पड़ी होगी। यहीं सब सोचकर वह रोने लगा।

रोने के कारण अचानक वह नींद से उठ गया। नींद से उठने पर उसे पता चला कि यह एक बुरा सपना था जो वह देख रहा था। तब तक सुबह भी हो चुकी थी। अब परीक्षा के परिणाम के लिए गोपाल मन से पुर्णतः तैयार था। उसने सोच लिया था कि परिणाम चाहे जो भी हो वह अपने जीवन और कर्म के प्रति हमेशा सकारात्मक रहेगा।

परीक्षा का परिणाम सुबह दस बजे इंटरनेट पर आने वाला था। गोपाल अपने मित्रों के साथ मिलकर परिणाम देख रहा था। कुछ स्कूल के दोस्तों को छोड़ कर सभी को अच्छे नंबर मिले थे। दिनकर, भार्गव और नीतिष को पंचानबे प्रतिशत से अधिक नंबर आए थे। गोपाल को भी तिरानबे प्रतिशत नंबर मिले थे। गोपाल तिरानबे प्रतिशत नंबर लाकर बहुत खुश था। उसकी सफलता से उसके मम्मी-पापा भी बहुत प्रसन्न थे।

गोपाल को अपनी खुशी में रात के सपने की बात याद आई, इसलिए उसने सोच लिया कि जिन छात्रों के परिणाम अपेक्षा के अनुरूप नहीं आए हैं, वो उन छात्रों का न मजाक बनाएगा और न बनाने देगा, बल्कि वह उन्हें प्रोत्साहित करेगा कि वह कड़ी मेहनत कर अगली बार इससे भी बड़ी और अच्छी सफलता ला सकते हैं।
( समाप्त )


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