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स्वदेश

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स्वदेश
( The Winner story, Feb, 2022 )
Writer: कोमल टंडन


## स्वदेश

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"ये जो देस है तेरा
स्वदेस है तेरा
तुझे है पुकारा
ये वो बंधन है जो कभी टूट नहीं सकता
ये जो देस है तेरा
स्वदेस है तेरा
तुझे है पुकारा
ये वो बंधन है जो कभी टूट नहीं सकता।"
रवि की आंख खुली तो पाया कि मां रसोई में काम करते हुए उसका फेवरिट गाना सुन रही थीं। करवट ली तो खटिया ने चूं-चूं की आवाज की। आंगन में आम के पेडं पर सभी पक्षी अपनी दैनिक दिनचर्या में व्यस्त थे और उनका कलरव उनकी व्यस्तता का अह्सास करा रहा था।

"उठ जा रवि, नौ बज गये।"

"मां सुबह होने का समाचार तो अब्दुल काका के मुर्गे ने बहुत पहले दे दिया था। इतनी जोर बांक देता है कि कुम्भकर्ण भी उठ जाता।"

"अरे गांव में तो लोगों ने घर के कितने काम निपटा लिए; तू सोता ही रहा। सुबह से फरीदा कितनी दफा पूछने आ चुकी कि रवि चाचा उठे या नहीं?"

फरीदा अब्दुल चाचा की पोती और उसके जिगरी दोस्त इमरान की बेटी, जिससे उसकी फोन पर अक्सर बात होती थी। दस साल के बाद रवि गाँव आया है। अंतिम बार फरीदा को देखा था तब वह पांच साल की थी। बहुत प्यारी और बातूनी। इमरान की मृत्यु का समाचार पिछले वर्ष ही मिला था। गांव के जमींदार ठाकुर बलवंत सिंह के यहां खेतों में काम करता था। उसके पिता का पोल्ट्री का कारोबार था, उसे भी वही संभालता था। चार छोटे भाइयों, माता-पिता सबकी जिम्मेदारी इमरान पर थी। जिस खंभे पर सबसे ज्यादा भार होता है वही सबसे पहले गिरता है। एक दिन खेत में काम करते समय अचानक गिर गया और फिर न उठा। उसकी याद आते ही रवि का मन उदास हो गया। वह उठा और ब्रश करने हैंडपंप पर बैठ गया।
"मिट्टी की है जो खुशबू
तू कैसे भूलाएगा
तू चाहे कही जाए
तू लौट के आएगा।
नई-नई राहों में
दबी-दबी आहों में
खोए-खोए दिल से तेरे
कोई ये कहेगा —
ये जो देस है तेरा
स्वदेस है तेरा
तुझे है पुकारा
ये वो बंधन है जो कभी टूट नहीं सकता।


"रवि चाचा उठ गये। बताइये कनाडा से क्या लाए मेरे लिए?" फरीदा अब 15 वर्ष की किशोरी हो चुकी थी। रवि ने उसे उसके उपहार दिये। जिसमें चॉकलेट, कपड़े और एक पायल की जोड़ी थी। फरीदा बहुत खुश हुई।

मांके हाथ की रोटियां और चूल्हे पर पकी दाल का आनंद ले रवि गांव में अपने पुराने दोस्तों व पहचान वालों से मिलने गया। शाम को खेतों पर गया। धान के लहलहाते खेतों की खुशबू फेफड़ों में भरी और गन्ने के खेत से एक गन्ना तोड़कर चूसते हुए पगडंडी पर बढ़ा जा रहा था कि अचानक उसे पगडंडी पर एक पायल दिखी। पास से देखा तो ये वही पायल थी जो उसने फरीदा को सुबह ही दी थी। जरूर अपने भाई को खाना देने खेत पर आई होगी। रास्ते में पायल खो दी। पायल लेकर रवि कुछ आगे बढ़ा तो एक चीख सुनी। एक जगह धान की बालियां टूटी थीं मानो कोई कुचल कर खेत में घुसा हो।

"कौन है वहां?" आवाज देता वो उसी ओर गया तो पाया तीन लड़के फरीदा को जकड़े हुए थे और एक उसका मुंह दबा रहा था। रवि को देख उन्होंने गुस्से में उस पर आक्रमण कर दिया। पर वो बच्चे कहां जानते थे कि रवि ने कनाडा में जूडो-कराटे सीखा व ब्लैक बेल्ट हासिल की थी। वो चारों पांच मिनट में इधर-उधर पड़े कराह रहे थे। उनमें से एक के कपड़े रवि ने फरीदा को पहनने को दिये क्योंकि उसके कपड़े तार-तार हो चुके थे। पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कर वो घर पहुंचे। घर पर रवि की मां को जब घटना का पता चला तो उन्हें अपने बेटे पर गर्व हो आया। आंख में आंसू लिए उसकी मां ने कहा, "बेटा तूने फरीदा को नहीं, मेरी उमा को बचाया है।"

उमा रवि से दस वर्ष बड़ी उसकी बहन थी जो चौदह वर्ष की आयु में गुजर गयी थी। रवि ने उसका दुपट्टा पकड़कर मां को छुप-छुप कर रोते कई बार देखा था। रवि को उस दिन पता चला कि उमा किसी बिमारी से नहीं मरी थी। वरन उसका बलात्कार कर लाश नाले में फेंक दी गयी थी। लाश जब मिली तो सारे सबूत धुल चुके थे। उसके कातिल आज भी आजाद घूम रहे थे। तभी रवि का मोबाइल बजा। सुनीता का फोन था। वह अमेरिका में जन्मी व कनाडा में पली-बढ़ी थी। रवि जल्द ही उससे शादी करने वाला था। पर अब...
"तुझ से जिंदगी है ये कह रही
सब तो पा लिया
अब है क्या कमीं—
यूँ तो सारे सुख हैं बरसे
पर दूर तू है अपने घर से
आ लौट चल तू अब दीवाने
जहा कोई तो तुझे अपना माने
आवाज दे तुझे बुलाने
वो ही देस
ये जो देस है तेरा
स्वदेस है तेरा
तुझे है पुकारा
ये वो बंधन है जो कभी टूट नहीं सकता"

पांच साल गुजर गये फरीदा और सुनीता गांव में आत्मरक्षा नामक जूडो-कराटे का स्कूल चलाती हैं जहां लड़कियों को मुफ्त कराटे व योग की क्लासेज दी जातीं हैं। अवंतिका एक प्रसिद्ध रिपोर्टर थी जो फरीदा और सुनीता का इंटरव्यू लेने उनके स्कूल आयी थी। स्कूल में मध्यम आवाज में गीत सुनायी दे रहा था।
"ये पल हैं वो ही
जिसमें है छुपी
पूरी एक सदी
सारी जिंदगी
तू ना पूछ रास्तें में काहे
आए हैं इस तरह दोराहे
तू ही तो है राह जो सुझाए
तू ही तो है अब जो ये बताए
जाए तो किस दिशा में जाए वो ही देस"
फरीदा उस रिपोर्टर को अपनी कहानी सुना रही थी तभी सुनीता भी आ गयी। वह भारतीय मूल के माता-पिता की संतान थी और कनाडा में पली-बढ़ी थी। उसके साथ दो वर्षीय बच्ची थी। "नमस्ते आपको यहां पहुंचने में कोई परेशानी तो नहीं आयी?" उसने विदेशी अंदाज में हिंदी बोली।

"नहीं मैं तो आराम से पहुंच गयी। गांव में सभी इस स्कूल को जानते हैं। फरीदा की कहानी तो मैनें सुन ली अब जानना चाहती हूं आप इससे कैसे जुड़ीं?"

"मैं और रवि शादी करने वाले थे तभी रवि ने इंडिया जाने की इच्छा जताई। एक दिन उसने मुझे फोन पर अचानक शादी के लिए मना कर दिया। कहा कि अब वो इंडिया में ही रहेगा। मैं गुस्से से भरी अगले दिन की फ्लाइट से इंडिया आ गयी। यहां पता चला कि रवि गांव की लड़कियों को आत्मरक्षा का गुण सिखाना चाहता है ताकि कोई उन्हें अकेला पा खेतों में न खींच सके, बस तब से मैं यहीं हूं। आज तीन गांवो में आत्मरक्षा के स्कूल हैं जिनके लिए विदेश से और स्वदेश से भी फंड मैं जमा करती हूं।"

"और रवि चाचा गांव-गांव ऐसे स्कूल स्थापित कर किसी-न किसी फरीदा को उसकी जिम्मेदारी देकर अगले गांव में पड़ाव डाल देते हैं।"

"वो मुझे और उमा, हमारी बेटी को बहुत कम समय दे पाते हैं। पर मैं फिर भी खुश हूं कि मैंने अपने माता-पिता की बात न मानकर यहां आने का निर्णय लिया।"

"रवि से मुलाकात न होने का दुख रहेगा पर आपसे मिलकर बहुत खुशी हुई। नमस्कार।"

"ये जो देस है तेरा
स्वदेस है तेरा
तुझे है पुकारा
ये वो बंधन है जो कभी टूट नहीं सकता।"
गाने की अंतिम लाइन के साथ ही अवंतिका ने अंतिम नजर स्कूल पर डाली।
( समाप्त )


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